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बिन्दुसार अमित्रघात

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              बिन्दुसार       अमित्रघात ० बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद वाह मौर्य सम्राट बना। बिंदुसार को विदेशी साहित्य और भारतीय साहित्य में भिन्न-भिन्न नामो से जाना जाता है । ० यूनानी लेखको ने बिंदुसार को अमित्रोचेडस , अमित्रोचेट्स और अलित्रोचेड्स नामो से संबोधित किया  है । ० चीनी विश्वकोश में बिन्दुसार बिंदुपाल नाम से पुकारा गया है। ० वायुपुराण में बिंदुपाल को कुछ अन्य पुराणों में उसका नाम वारिसार भी मिलता है। ० जहां संस्कृत में उसके लिए अमित्रघाट अथवा अमित्खाद जिसका अर्थ होता है शत्रुओं का संघारक  नाम का प्रयोग किया गया है। लेकिन उसका प्रचलित नाम बिंदुसार ही था । ० चंद्रगुप्त मौर्य की ही तरह बिंदुसार का भी मंत्री चाणक्य ही था । ० तिब्बती इतिहासकार तारा नाथ का मत है कि 16 राज्यों के राजाओं और सामंतों के विनाश कर साथ ही पूर्वी समुद्र और पश्चिमी समुद्र तक के सारे प्रदेश पर अधिकार कर लिया ।चाणक्य ने इन राज्यों का अधिपति बिंदुसार को बनाया । ० बिंदुसार को अपने शासनकाल में प्रजा के विद्रो...

चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास

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 मौर्य साम्राज्य का भारत के इतिहास में विशेष महत्व है । इस वंश के उदय के साथ ही भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में नव युग का प्रारंभ होता है ।                      मौर्य वंश के प्रादुर्भाव से जहां भारत में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना होती है वही निश्चित तिथि क्रम में भी ज्ञात होना प्रारंभ हो जाता है चंद्रगुप्त मौर्य के सिंहासरोहण की तिथि भारतीय इतिहास के काल क्रम में एक ज्योतिर्मय स्तंभ है। मौर्य काल में जहां भारत में सुसंगठित शासन - व्यवस्था की स्थापना हुई और शासन में एकरूपता आई। मौर्य शासन की स्थापना से भारत में विदेशी सत्ता का अंत हो गया।          इतिहासकार स्मिथ का कथन है कि मौर्य वंश का प्रादुर्भाव "इतिहासकारों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है ।" मौर्य काल के जानकारी के स्रोत           मौर्य काल की जानकारी हमें साहित्यिक एवं पुरातात्विक दोनों साधनों से प्राप्त होती है। इन साधनों से हमें उस काल की राजनीतिक आर्थिक प्रशासनिक एवं सामाजिक अवस्था की जानकारी मिल...