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indus valley civilization

        सिंधु घाटी सभ्यता हड़प्पा की कहानी : मानव सभ्यता का प्राचीनतम रुप नदियों की घाटियों में बसे नगरों और ग्रामों में देखने को मिलती है। फिर वह मिस्र में नील नदी मेसोपोटामिया में दजला और फुरात नदियों के किनारे विकसित हुई मानव सभ्यता हो या आज से 5 या 6000 वर्ष पूर्ण विकसित हुई उच्चकोटि की मानव सभ्यता जो भारत वर्ष में सिंधु नदी की घाटी में विकसित हुई । इस उच्चकोटि की सभ्यता के अवशेष सिंधु पंजाब, गुजरात, सौराष्ट्र आदि अनेक स्थलों के उत्खनन से प्राप्त होती है।   * इस सभ्यता की खोज ने 1921 ई० तक इतिहासकारों की धारणा को ही परिवर्तित कर दिया जिसमें वे भारत की प्राचीनतम सभ्यता वैदिक सभ्यता को बताते थे । * सिंधु नदी की 'घाटी   में स्थित मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि स्थलों की खुदाई में प्राप्तवस्तु के अवशेषों ने प्रमाणित कर दिया कि आर्यों की सभ्यता से पूर्व भी भारत में सिंधु नदी की घाटी में एक उच्च कोटि की  नागरिक सभ्यता विकसित हो चुकी थी ।जो समकालीन मिश्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से अधिक विकसित थी । * सिंधुघाटी की सभ्यता के संबंध में हमारे जानकारी मुख्यतः प...

सम्राट अशोक

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 सम्राट अशोक (269 ई. पू. -232  ई.पू.)                 अशोक भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के प्रमुख शासकों में से एक है उसे सम्राटों में महानतम सम्राट कहा जाता है ।वाह बिंदुसार की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य का शासक बना अशोक की महानता का कार्य विशाल साम्राज्य नहीं बल्कि उसके चरित्र उसके आदर्श और उन सिद्धांतों को बताया गया है जिसके आधार पर उसने शासन किया इतिहासकार एस.जी.वेल्स के अनुसार प्रत्येक युग प्रत्येक राष्ट्र ऐसे राजा को जन्म नहीं दे सकता ।अशोक की  समता आज तक भी विश्व इतिहास में किसी अन्य से नहीं की जा सकती । प्रारंभिक जीवन -अशोक के आरंभिक जीवन के विषय में हमें अभिलेखों से विशेष जानकारी नहीं मिलते इसीलिए साहित्यिक  सक्ष्य पर मुख्यता निर्भर रहना पड़ता है । ० बुद्ध घोष की रचनाएं '  - 'समन्त पासादिका '   ०  बौद्ध ग्रंथ -आयुमंजुश्रीमूल - कल्प  ० गाथाए -महावंश ,दीपवंश , दिव्यावदान, अशोकावदान  ० ब्राह्मण धार्मिक साहित्य में केवल पुराणों में अशोक का उल्लेख है । ० धर्मेतर  साहित्य में य...

बिन्दुसार अमित्रघात

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              बिन्दुसार       अमित्रघात ० बिंदुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था। चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद वाह मौर्य सम्राट बना। बिंदुसार को विदेशी साहित्य और भारतीय साहित्य में भिन्न-भिन्न नामो से जाना जाता है । ० यूनानी लेखको ने बिंदुसार को अमित्रोचेडस , अमित्रोचेट्स और अलित्रोचेड्स नामो से संबोधित किया  है । ० चीनी विश्वकोश में बिन्दुसार बिंदुपाल नाम से पुकारा गया है। ० वायुपुराण में बिंदुपाल को कुछ अन्य पुराणों में उसका नाम वारिसार भी मिलता है। ० जहां संस्कृत में उसके लिए अमित्रघाट अथवा अमित्खाद जिसका अर्थ होता है शत्रुओं का संघारक  नाम का प्रयोग किया गया है। लेकिन उसका प्रचलित नाम बिंदुसार ही था । ० चंद्रगुप्त मौर्य की ही तरह बिंदुसार का भी मंत्री चाणक्य ही था । ० तिब्बती इतिहासकार तारा नाथ का मत है कि 16 राज्यों के राजाओं और सामंतों के विनाश कर साथ ही पूर्वी समुद्र और पश्चिमी समुद्र तक के सारे प्रदेश पर अधिकार कर लिया ।चाणक्य ने इन राज्यों का अधिपति बिंदुसार को बनाया । ० बिंदुसार को अपने शासनकाल में प्रजा के विद्रो...

चंद्रगुप्त मौर्य का इतिहास

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 मौर्य साम्राज्य का भारत के इतिहास में विशेष महत्व है । इस वंश के उदय के साथ ही भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में नव युग का प्रारंभ होता है ।                      मौर्य वंश के प्रादुर्भाव से जहां भारत में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना होती है वही निश्चित तिथि क्रम में भी ज्ञात होना प्रारंभ हो जाता है चंद्रगुप्त मौर्य के सिंहासरोहण की तिथि भारतीय इतिहास के काल क्रम में एक ज्योतिर्मय स्तंभ है। मौर्य काल में जहां भारत में सुसंगठित शासन - व्यवस्था की स्थापना हुई और शासन में एकरूपता आई। मौर्य शासन की स्थापना से भारत में विदेशी सत्ता का अंत हो गया।          इतिहासकार स्मिथ का कथन है कि मौर्य वंश का प्रादुर्भाव "इतिहासकारों को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है ।" मौर्य काल के जानकारी के स्रोत           मौर्य काल की जानकारी हमें साहित्यिक एवं पुरातात्विक दोनों साधनों से प्राप्त होती है। इन साधनों से हमें उस काल की राजनीतिक आर्थिक प्रशासनिक एवं सामाजिक अवस्था की जानकारी मिल...